आज भारतीय दो अलग -अलग विचारधाराओं द्वारा शाशित शोषित हो रहे हैं। उनके राजनीतिक आदर्श जो संविधान के प्रस्तावना में इंगित हैं वो स्वतंत्रता , समानता , और भाई -चारे को स्थापित करते हैं। और उनके धर्म में समाहित सामाजिक आदर्श इससे इनकार करते हैं।डा.आम्बेडकर
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रविवार, 20 अक्टूबर 2013

baba saheb

भीम होते तो अन्याय भी ज्यादा नहीं होता,
ये एकता का चाँद भी आधा नहीं होता,
आगे कोई न आता मेरे बाबा भीम के,
मगरूर न होता कोई, दादा नहीं होता,

तेरा ये जहान है, बाबा की तू शान है, क्रांति का तूफान है, 

आगे-आगे बढ़ना तू भीम की संतान है,
भीम की ताकत बांहों में तेरी,
क्रांति छलके आहो में तेरी,
तेरा जिगर है शेर का प्यारे,
देता जा जय भीम के नारे,
आगे-आगे बढ़ना तू भीम की संतान है,

गुरुवार, 27 जून 2013

बाबा साहेब की हिम्मत को ,सौ-सौ बार प्रणाम !


बन के सिंह दहाड़े बाबा ,
कितने शूर पछाड़े बाबा ,
दुर्लभ चिंतन और मनन से ,
मनु के गणित बिगाड़े बाबा !
जला दिया कानून पुराना ,मिला बहुत आराम !
बाबा , सौ-सौ बार प्रणाम !
सबके जीवन दर्पण बाबा ,
सब कुछ तुमको अर्पण बाबा ,
नेक राह दिखलाने वाले ,
युग द्रष्टा आकर्षण बाबा !
सुबह जागते ही होंठो पे ,बाबा तेरा नाम !
बाबा ,सौ-सौ बार प्रणाम !!

बुधवार, 19 जून 2013

आपकी जय हो भीम महान, बना दिया भारत का संविधान,




via facebook
आपकी जय हो भीम महान, बना दिया भारत का संविधान,
आपने मनु विधान जलाया, भारत का संविधान बनाया,
दिया सबको अधिकार समान, बना दिया भारत का संविधान,
आप ने भारत की सब नारी, शोषित, पीड़ित, दलित उभारी,
दिलाया सबको जग में मान, बना दिया भारत का संविधान,
केवल सुनकर नाम तुम्हारा, पाखंडवाद कांपता सारा,
कांपे बड़े-बड़े शैतान, बना दिया भारत का संविधान,
देकर बुद्ध धम्म की माया, कर दी बौद्धि व्रक्ष की छाया,
मिल गए हमें बुद्ध भगवान्, बना दिया भारत का संविधान,
जब तक है सागर में पानी, अमर रहेगी भीम कहानी,
रहेगा अमर भीम बलिदान, बना दिया भारत का संविधान,
चरणों शोषित शीश झुकाते, हम श्रदा के सुमन चढाते,
करते सब मिलकर गुणगान, बना दिया भारत का संविधान,

जय भीम जय भारत

गुरुवार, 13 जून 2013

पैगाम था ये भीम का तुम आगे ही बढ़ो

पैगाम था ये भीम का तुम आगे ही बढ़ो,
लेकर कलम सी तलवार से अन्याय से लड़ो,
अब न वो मंजर है अब न है कोई साथी, 
आपस में ही हम करते अब हाथा-पाती,
टुकड़ों में बिखरे है आज के सब साथी,
फिर कैसे होगा उजाला कैसे होगी क्रांति,
पढ़ लिख कर देखो कैसे हुए पराये,
कोई तो जा कर उनकों तो ये समझाए
जिनकी वजह से हम इस मुकाम पर आये, 
फिर क्यों लबों पर दूजे का नाम आये, 
आने वाले कल में तुम कुछ कर के दिखाओ, 
सारे ही भारत को तुम बोधमय बनाओ, 
भीम का यही था सपना तुम पूरा उसे बनाओ, 
घर-घर में पंचशील का नारा तुम लगाओ !
जय भीम जय प्रबुद्ध भारत

डॉ अम्बेडकर के होने या नही होने का क्या अर्थ है


आज हमें जो प्राप्त है जिसमें सर्वप्रथम शिक्षा, वह भी आरक्षण की देन है। जिसकी वजह से एक बच्चा स्कूल, कॉलेज, विश्वाविद्यालय में भर्ती होता है
तभी तो वह डॉक्टर, इंजीनियर और वकील बनता है और उसके बाद उसे मिलती है सरकारी नौकरी, वो भी आरक्षण की वजह से, और फिर वही प्रक्रिया उसकी संतान के लिए प्रारम्भ हो जाती है। जिसकी वजह से समाज के वे व्यक्ति जिन्हें किसी न किसी पद पर नौकरी मिल गई है। जिसके कारण वे आज कारों में घुमते है, बंगलों में रहते है और अपने आपको डॉक्टर, इंजीनियर, कलेक्टर या राजपत्रित अधिकारी कहते है। यह बात ध्यान देने योग्य है कि यह आरक्षण तो डॉक्टर बी.आर. अम्बेडकर देकर चले गये, जिसके कारण आज गरीब, असहाय, दलित और पिछड़े लोग सम्मान से जीने का अधिकार कुछ हद तक हासिल कर पाए है। लेकिन अब बात यह है कि इस आरक्षण की सुरक्षा कैसे करें? क्योकि यह आरक्षण वे कितने बड़े संघर्ष के बाद आप और हमें दे पायें तथा उन्होने उन लोगों के सामने संघर्ष किया जो उन्हें कतई पसन्द नही करते थे जो उनके जीवित रहते हुए भी उनके साथ भेदभाव किया करते थे और उनकी मृत्यु के बाद भी भेदभाव किया। इसी का उदाहरण है कि कांग्रेस ने अपने नेताओं को मृत्यु से पूर्व या मृत्यु होने के तुरन्त बाद भारत रत्न की उपाधि ( जैसे जवाहर लाल नेहरू वर्ष 1955, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद 1962, डॉ. जाकिर हुसैन 1963, लाल बहादुर शास्त्री 1966, इन्दिरा गांधी 1972)से सुशोभित कर दिया और जब 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनती है उसको भी नही लगता कि डॉ. बी.आर. अम्बेडकर को भारत रत्न देना चाहिए और फिर तीसरे मोर्चे की सरकार 1990 में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर को भारत रत्न की उपाधि से सुशोभित करती है। ऐसे श्रेष्ठ विद्वान, संविधान निर्माता, महान व्यक्ति के साथ भेदभाव नही तो क्या है? यह इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस व जनता पार्टी दलितों, गरीबों की हितेशी कभी नही रही और ना है। यदि डॉ. अम्बेडकर उच्च वर्ग से संबंधित होते तो उन्हें उनकी मृत्यु वर्ष 1956 या उससे पूर्व ही उन्हें भारत रत्न की उपाधि दे दी जाती। आप सोच सकते है कि कांग्रेस ने कितनी बड़ी मजबूरी ने डॉ. अम्बेडकर को संविधान ड्राफ्टिंग कमेटी का चेयरमेन तथा भारत का प्रथम कानून मंत्री बनाया। यदि डॉ. अम्बेडकर अपने समय में इतने बेहतरीन, श्रेष्ठ कानून विद्, बेरिस्टर, विधिवेता नहीं होते तो षायद आज हमारी स्थिति इतनी दयनीय होती कि आप और हम, आज उसकी कल्पना भी नही कर सकते। कांग्रेस व जनता पार्टी कि सोच में आज भी कोई बदलाव नही आया है। उसकी का परिणाम है कि सरकार द्वारा तैयार महिला आरक्षण बिल, जिसके द्वारा महिलाओं को संसद, विधान सभा में 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना है, में एस.सी., एस.टी. की महिलाओं को आरक्षण नही दिया गया है क्येाकि अब डॉ. अम्बेडकर तो रहे नही। महिला आरक्षण बिल बनाने वाले आज भी उच्च वर्ग के लोग है इसलिए उन्हें गरीबों व दलितों के आरक्षण से क्या लेना देना है। यदि आने वाले वर्षो में लोक सभा चुनाव में कांग्रेस या भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलता है तो महिला आरक्षण बिल में दलित व असहाय, गरीब महिलाओें को बिना आरक्षण दिये ही पास कर दिया जायेगा और सभी उच्च वर्ग की महिलाएं संसद भवन में होगी और आपके और हमारे परिवार में से कोई भी महिला वहां नही होगी और तब उसके अधिकारों का शोषण ऐसे ही होता रहेगा। आज डॉ. अम्बेडकर जैसे कानूनविद् नही होने के कारण आज सुप्रीम कोर्ट द्वारा पदोन्नति में आरक्षण पद दिये गये निर्णय को आधार रखकर राजस्थान हाई कोर्ट अपना अन्तरित आदेश देता है कि आरक्षित वर्ग का अधिकारी अपने अधीनस्थ सामान्य वर्ग के कर्मचारी की ए.सी.आर. नही भरने तथा पदोन्नति प्राप्त आरक्षित वर्ग के अधिकारियों को पदावनत करने का आदेश देता है। जब आपको पूर्ण अधिकार ही नही मिलेगा तो आप सफल कैंसे होगें ? जो लोग भारत रत्न के पुरस्कार में इतना भेदभाव करते हो, उनसे महिला आरक्षण बिल में गरीब व पिछड़ों को आरक्षण देने की कैसे उम्मीद की जा सकती है? आज जिसे आरक्षण मिला है वे अपने बच्चों को आई.आई.टी., पी.एम.टी. के द्वारा इंजीनियर, डॉक्टर, आई.ए.एस. बना रहे है, आज ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है कि जो आरक्षण मिला है उसकी भी सुरक्षा नही कर पा रहे है और चारों तरफ दलित समाज के बुद्धिमान लोग अपने अधिकारों के हनन की बात कर रहे है और आरक्षण के विरोध में हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय आ रहे है। दलित समाज के बुद्धिमान लोग अपने अधिकारों की सुरक्षा की बात करते है और डॉ. अम्बेडकर के महान कार्यो की प्रशंसा करते है लेकिन वे इस ओर ध्यान नही दे रहे है कि डॉ. अम्बेडकर ही ऐसा महान कार्य क्यों कर पाए, क्येांकि वे अपने समय में बेहतरीन, श्रेष्ठ कानूनविद्, बेरिस्टर, विधिवेता थे। यदि आप चाहते है कि आप समाज में सम्मान से जीये तथा अपने कार्यो में सफलता प्राप्त करें तो यह बहुत जरूरी है कि आपके अधिकार सुरक्षित हो, कोई भी व्यक्ति बिना पूर्ण अधिकारों के सफलता प्राप्त नही कर सकता है। अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए अपने बच्चों को कानून की शिक्षा दे, उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर, चाटेर्ड एकाउटेन्ट, आई.ए.एस. नही बनाये उन्हे कानूनविद्, मजिस्ट्रेट (आर.जे.एस., आर.एच.जे.एस.) बनाये। अन्यथा जिस आरक्षण से अपने बच्चों को पी.एम.टी., आई.आई.टी. करवाकर डॉक्टर, इंजीनियर, आई.ए.एस. बना रहे है वो आरक्षण एक दिन समाप्त हो जायेगा, क्योंकि डॉक्टर, इंजीनियर, आई.ए.एस. आरक्षण की सुरक्षा नही कर सकते इसके लिए श्रेष्ठ कानूनविद्, विधिवेता चाहिए। डॉक्टर, इंजीनियर, आई.ए.एस. नही । आज समाज के लोग कहते है कि हमारे समाज के वकील हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में बहस करने लायक नही है। मैं उन लोगों से इतना ही कहना चाहूंगा कि जो बच्चे परिक्षाओं में 70 या 80 प्रतिशत अंक प्राप्त करते है वे तो आरक्षण की वजह से डॉक्टर, इंजीनियर, आई.ए.एस. बन रहे है और जो बच्चे 40 या 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करते है वे एल.एल.बी. कर एडवोकेट बन रहे है, तो ऐसी स्थिति में हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में मजिस्ट्रेट, बेहतरीन एडवोकेट कहां से मिलेगें। आप प्रतिभावान बच्चों को कानून की शिक्षा दे तो वे आगे चलकर हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में मजिस्ट्रेट तथा श्रेष्ठ अधिवक्ता बनेगें और जिससे आपके वे सारे अधिकार सुरक्षित होगें जो समाज में सम्मान से जीनें के लिए चाहिए।
राजस्थान मेघवाल परिषद्

निकलती रहेगीं जय भीम की आवाजें जब तक एक कतरा भी खुन हे मेरे जिस्म में


पिछले कई हजार सालो तक कोई भी भगवान हमारी मदद करने को नहीं आया | किसी भी भगवान ने ये नहीं सोचा कि ये भी इन्सान है इनको भी जीने का अधिकार हे, उस भगवान को मै क्यों मानू ? मै  उस
इन्सान को मानता हूँ जिसने इन सभी बातो को जाना और हमको हर तरह की से मुक्ति दिलाने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया | उन्होंने सारा जीवनहमको पशु से इन्सान बनाने के लिए बलिदान कर दिया और हमको इन्सान बना कर ही दम लिया |मेरे भगवान तो वही बाबा साहब है जिनकी वजह से मै आज आजाद हूँ | जिनकी वजह से मैंने शिक्षा प्राप्त की,वही मेरे भगवान है | जिनकी वजह से मै आज सिर
उठाकर चल सकता हूँ वही बाबा साहब मेरे भगवान है और मै उन बाबा साहब को नमन.....करता हु.| "
निकलती रहेगीं जय भीम की आवाजें जब तक एक कतरा भी खुन हे मेरे जिस्म में ............... ...............
.......जय भीम साथियों......

मंगलवार, 16 अप्रैल 2013

आखिर क्या चाहते थे बुद्ध और बाबासाहब के शुभ अवसर

बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर और बाबा रामदेवजी 

जो लोग समझते है बाबासाहब के छायाचित्र लगाना, जगह जगह उनकी मुर्तिया प्रस्थापित करना, साल में तिन चार बार पूजा करना, जयंती उत्सव मनाना ही बाबासाहब का सम्मान है तो मैं समझाता हु की बाबासाहब के अविरत संघर्
ष और कार्य का हमने बहुतही बेहूदा और घटिया मूल्याङ्कन किया है। जिस महापुरुषने अपने जीवन के आखरी क्षणों तक कहा की ' मेरे नाम की जय जयकार करने कीबजाई मेरे दृष्टी से जो महत्वपूर्ण कार्य है उसे अपने प्राणों से ज्यादामहत्व देकर पूरा करने का प्रयास करो' । और विडम्बना तो देखो की उस महापुरुष के सम्पूर्ण जीवन कार्य तथा आन्दोलन को जोरदार नारेबाजी, रेलीया, जबरदस्त चन्दा वसूली, नशे में जयंती के अवसर पर थिरकते लोग, रंग गुलाल और नाच गानों पर बेहताशा खर्च इस प्रकार की बातो मैं तब्दील किया जाताहै. और हमें लगता है हम बाबासाहब का सम्मान कर रहे है . और यह सब करते समय हमारी मानसिकता इतनी संकुचित हो गई हैकी हमे लगता है की जो लोग और जो संगठन ऐसा कर रहे है वो बाबासाहब कासम्मान कर रहे है .साथियों यह सब बाबासाहब और हमारे सभी महापुरुषों के आचरण के विरुद्ध है .हम ऐसा करके बाबासाहब के सपनो का भारत निर्माण नहीं कर सकते. खास करके समाज के बुद्धिजीवी वर्ग ने तो ऐसा नहीं करना चाहिए क्योकि बाबासाहब ने बुद्धि जीवी वर्ग के निर्मिती को प्राथमिकता दी है. वे जानते थे की बुद्धिजीवी वर्ग व्यवस्था परिवर्तन का आन्दोलन चला सकता है . तो क्या अनुसूचित जाती ,अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्य वर्ग से निर्मित बुद्धिजीवी वर्ग अपने निर्माताओ की इच्छा अनुरूप कार्यरत है ? इसकी समीक्षा करने केबाद पता चलता है की यह वर्ग ऐसे किसी कार्य मे सक्रिय रूप से भागीदार दिखाई नही देता । इतना ही नही, जिस समाज से यह वर्ग आया है , उस समाज कोभी यह उपेक्षित भाव से देखता है और उससे दूर रहता है । यह अनुभव अपनेजीवन काल के उत्तरार्ध मे बाबासाहब डाँ अंबेडकर को भी हुआ और उन्होने बड़ेही दुखी मन से 18 मार्च 1956 को आगरा के रामलिला ग्राउंड मे कहा की "मुझे पढ़े लिखे लोगों ने धोखा दिया है, मै सोचता था की पढ़ लिखकर यह वर्ग अपने समाज की सेवा करेगा , मगर मै देख रहा हूँ की मेरे इर्द-गिर्द क्लर्को की भीड़ इकट्ठा हुई है , जो अपना ही पेट पालने मे लगी हुई है ।" यह आहत भावनाइस बात का सबूत है की पढ़ा लिखा बुद्धिजीवी वर्ग अपने समाज से और उसके स्नेहभाव से दूर दूर जा रहा है । यही वजह है की गाँवो मे रहने वाले लोगोके साथ अन्याय, अत्याचार और भेदभाव का व्यवहार बढ़ गया है । जिस कार्य के लिए डाँ बाबासाहब अंबेडकर ने इस वर्ग का निर्माण किया था उसकार्य मे यह वर्ग दिखाई नही देता। जिस वर्ग से नेतृत्व की अपेक्षा की गईथी , वह वर्ग सरकार का नौकर बनकर रह गया है , आधे अधूरे और कच्चे लोगो केहाथो मे आंदोलन की बागडोर छोड़ दी गई है । इसका नतीजा हम देखते है की हमारे महापुरुषो का आंदोलन आज चलता हुआ नजर नही आता । 

इसलिए बुद्धिजीवीवर्ग को वही कार्य करना चाहिए जिसकी उसके निर्माताओ ने उनसे अपेक्षा कीथी . देशभर मैं गैरबराबरी की व्यवस्था चल रही है. जब तक उस व्यवस्था मैं परिवर्तन नहीं होता तब तक अनु.जाती, अनु.जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्य वर्ग के लोग व्यवस्था मैं पिसते रहेंगे, और उनके साथ हर तरह का भेदभाव होते रहेगा . इसीलिए बुद्धिजीवी वर्ग को व्यवस्था परिवर्तन के लिए संगठित होना चाहिए , संगठित करना चाहिए और एक प्रभावी आन्दोलन बनाना चाहिए. आओं हम सब बुद्ध के जन्मदिन के शुभ अवसर पर उनके सपनो का भारत निर्माण करने का प्रण करते है .